फर्जी विकलांगता प्रमाण-पत्र से नौकरी हासिल करने का सनसनीखेज आरोप


*जांच और सेवा समाप्ति की मांग, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल*

*महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी रजनी शुक्ला पर फर्जी विकलांगता प्रमाण-पत्र बनवाकर नौकरी लेने का आरोप*

छतरपुर। विकलांग बल संगठन एक के पदाधिकारी ने राजनगर की महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी पर फर्जी विकलांगता प्रमाण-पत्र बनवाकर नौकरी हासिल करने का गंभीर आरोप लगाया है। पदाधिकारी का दावा है कि अधिकारी ने डॉक्टरों से सांठगांठ कर प्रमाण-पत्र तैयार करवाया और अब शिकायतों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करवा रही हैं। उन्होंने मामले की जांच, सेवा समाप्ति और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है, अन्यथा उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी दी गई है।
विकलांग बल संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हेमन्त सिंह कुशवाह ने बताया कि राजनगर में पदस्थ महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी श्रीमती रजनी शुक्ला ने फर्जी तरीके से विकलांगता प्रमाण-पत्र बनवाकर पद हासिल किया है। रजनी शुक्ला ने 2008 में बी.कॉम अंतिम वर्ष और 2010 में एम.कॉम अंतिम वर्ष की डिग्री हासिल की, लेकिन अध्ययन के दौरान स्कूल अभिलेखों में विकलांगता का कोई जिक्र नहीं है और न ही उन्हें कोई लाभ मिला, क्योंकि उन्हें कोई विकलांगता नहीं है। आरोप है कि नौकरी पाने के लिए उन्होंने सागर जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों से सांठगांठ कर फर्जी प्रमाण-पत्र बनवाया, जिसकी गोपनीय जांच जरूरी है। रजनी शुक्ला पर कर्तव्यों का दुरुपयोग और धांधली का भी आरोप है, जिसकी कई बार शिकायत की गई। जब हेमन्त ने उनके नियुक्ति दस्तावेजों के लिए सूचना का अधिकार के तहत आवेदन दिया, तो बौखलाकर रजनी ने फर्जी मुकदमा दर्ज करवाया, जिसकी जांच पुलिस अधीक्षक कर रहे हैं। मांग है कि आवेदन की जांच कर रजनी शुक्ला और संबंधितों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए, उनकी सेवा समाप्त की जाए और वेतन राशि वसूल की जाए। अन्यथा उच्च न्यायालय जाना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

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